लॉकडाउन में ये उपन्यास पढना काढ़ा पिने से कम नही
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मोबाइल
के टिप टाप से अच्छा इस किताब को पढ़े ये काढ़ा है आत्मा को बूस्ट करने के लिए क्योंकि खाली और लंबा समय घर में अब लोग इसकी वजह से मानसिक बीमार भी होने लगे है जो लोग किताब पढने के शौक़ीन है उनके लिए तो
रामबाण है
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यूँ समझिए तो बूस्टर है और ये जो लोग नहीं पढ़ते
दिन भर मोबाइल में टिप टाप कर रात में सोते वक्त तकिए के पास अपना मोबाइल ऐसे रखते
है जैसे की कोई खजाना हो सुबह आँख खुलते ही सबसे पहले मोबाईल का डाटा खोलते है और फिर
सफरनामा शुरू हो जाता है दिन भर का
अब इससे कोई अछूता नही क्या बड़े, क्या बूढ़े, क्या बच्चे आजकल सबको टिप टाप की लत लग गई है इस लत ने लॉक डाउन में और बढ़ा दिया बहुत कम लोग है जो अब उपन्यास के पन्नो को पलट इसकी महक महूस करते है या कागज में लिखे स्याह में खुद
तलाशते हैऔर सबसे दुःख की बात ये है की हम अपने आने वाले
समाज के बच्चों को भी ये सिखा नही पा रहे की किताबों से प्यार करो मगर इस लॉक डाउन किताब को पढ़ा जाना चाहिए ये किताब बिहार के ही छात्र ने लिखा जो महज 16 शाल का है किताब का
शीर्षक भी बड़ा कमाल है आधा जीवन पूरा लॉकडाउन में[half life in full lockdown] जो की गूगल पे मिलेगी पे सर्च करने
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ये किताब
मिल जाती है समय जो अब बहुत भारी लगता है इसमें किताबों को पढ़ के और बच्चों को
प्रेरित कर के कुछ सिखा सकते है ये किताब इसीलिए भी खास है की इसमें एक लडके की
नजर से जीवन को देखने का नजरिया जू हम सबों को पढना चाहिए https://www.amazon.in/dp/1649512562

अतिसुंदर🖊
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