बच्चे सिर्फ माँ की जिम्मेदारी नही है बल्कि पिता का भी है!
बच्चा कोई भी ग़लती करे घर हो या बाहर हमेशा यही कहा जाता है ‘लगता है इसकी माँ ने इसे कुछ नहीं सिखाया!’ या बच्चे से कोई गलती हो जाए तो पिता हमेशा माँ को दोषी ठहराएगा तुम्ही ने ध्यान नही दिया होगा बच्चे पे कोई ध्यान कहाँ रखा अगर कोई बड़ी उम्र का व्यक्ति तक कोई ग़लती करे तब भी यही कहा जाता है। आज कितने विज्ञापनों में माँ ही बच्चे को डाइपर पहनाने से लेकर, अच्छी आदतें सिखाना, उसके कपड़े साफ़ कैसे धोने हैं और उसके दिमाग की शक्ति के लिए उसे हेल्थ ड्रिंक पिलाना सबकुछ माँ ही करती हुई नज़र आती है। मां को ही डॉक्टर, शेफ़, टीचर और हर काम मैनेज करने वाली सुपरवुमन बनाकर पेश किया जाता है। एक तरह से पूंजीवादी पितृसत्ता ने माँओं को एक ऐसी संस्था बना दिया है जो हर तरीक़े से बच्चे के विकास के लिए ज़िम्मेदार है। इस बात में कोई शक नहीं कि पितृसत्ता ने हमेशा से औरतों को अपने काबू में रखना चाहा है। एक लड़की के बड़े होते ही उसे उसके छोटे भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी थमाई जाती है। साथ ही घर के सभी कामकाज भी उनसे कराये जाते हैं और ये सारे भेदभाव सिर्फ़ जेंडर की तर्ज पर किए जाते है। हमेशा से लड़कियों के ...