“निजी स्वतन्त्रता आज सबों की जरूरत हैं"

“निजी स्वतन्त्रता”

जोसेफ़ स्तालिन ने कहा था

मेरे लिए यह कल्पना करना कठिन है कि एक बेरोज़गार भूखा व्यक्ति किस तरह की “निजी स्वतन्त्रता” का आनन्द उठाता है। वास्तविक स्वतन्त्रता केवल वहीं हो सकती है जहाँ एक व्यक्ति द्वारा दूसरे का शोषण और उत्पीड़न न हो; जहाँ बेरोज़गारी न हो, और जहाँ किसी व्यक्ति को अपना रोज़गार, अपना घर और रोटी छिन जाने के भय में जीना न पड़ता हो। केवल ऐसे ही समाज में निजी और किसी भी अन्य प्रकार की स्वतन्त्रता वास्तव में मौजूद हो सकती है, न कि सिर्फ़ काग़ज़ पर।

Comments

Popular posts from this blog

सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले को क्यों जाने

बच्चे सिर्फ माँ की जिम्मेदारी नही है बल्कि पिता का भी है!