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Showing posts from June, 2018

विकास की इन तस्वीरों का यह अहसास अचानक ही धुंधला जाता है.

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तरक्की की इबारत पेश करती आलीशान इमारतें और सड़कों पर फर्राटे भरती लकदक गाड़ियां. बेहतरीन स्कूली ड्रेस में सजे—संवरे बच्चे और उनके पीछे—पीछे स्कूल बैग उठाकर चलते उनके माता—पिता. सचमुच कितना लुभावना है यह शहरी माहौल. अपनी कथित सभ्रांत सभ्यता पर इतराते शहर को देख एकबारगी जेहन में उभरता है कि वाकई देश तरक्की की राह पर है.  तरक्की की इस रफ्तार में आने वाले दिनों में अपने देश को चुनौती देने वाला कोई नहीं होगा. लेकिन, विकास की इन तस्वीरों से निगाह घूमते ही यह अहसास अचानक ही धुंधला जाता है. सड़क किनारे मैले—कुचैले कपड़ों में अधनंगी बच्ची मुस्कुराहट बरबस ही ध्यान खींच रही थी. शायद उसे भी यह अंदाजा नहीं कि यह मुस्कुराहट उसकी स्वाभाविक है या फिर तरक्की के क्रूर मजाक पर यह उसकी मौन प्रतिक्रिया है. बहरहाल, मलिन चेहरे के बीच जुगनू सी जगमगाती उसकी आंखों में अच्छा खाने, पहनने और स्कूल जाने के टूटे सपनों का अक्स साफ उभर रहा था. एकाएक शहर की तमाम शानो—शौकत और रंगीनियों को इस बच्ची की तस्वीर ढांप लेती है. क्या यह वही देश है जिसकी खूबसूरती पर इतराने को मन बेताब था? क्या यह देश की तरक्की की...

Women empowerment

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The actual devlopment of any society can be seen in its treatment of its women because women is not only child bearer but also the one who ensure nurture and selfless care to but in india we so called civilged people focus on talking on them but on actual labelled we lacking on fighting for vulnerable parts women and children we need to be think of that where we are going mostly feminist use term that women empowerment as a phenomenon is not some thing new it has been their through out year so we need to be understand political empowerment of women

चरित्रहीन' कौन, पुरूष या स्त्री और ईसका जिम्मेदार कौन?

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सरिता राय  स्त्री तब तक 'चरित्रहीन' नहीं हो सकती जबतक कि पुरुष चरित्रहीन न हो। संन्यास लेने के बाद गौतमबुद्ध ने अनेक क्षेत्रों की यात्रा की। एक बार वे एक गांव गए। वहां एक स्त्री उनके पास आई और बोली आप तो कोई राजकुमार लगते हैं। क्या मैं जान सकती हूँ कि इस युवावस्था में गेरुआ वस्त्र पहनने का क्या कारण है ? बुद्ध ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया कि तीन प्रश्नों के हल ढूंढने के लिए उन्होंने संन्यास लिया। बुद्ध ने कहा- हमारा यह शरीर जो युवा व  आकर्षक है वह जल्दी ही वृद्ध होगा फिर बीमार व अंत में मृत्यु के मुंह में चला जाएगा। मुझे वृद्धावस्था, बीमारी व मृत्यु के कारण का ज्ञान प्राप्त करना है। बुद्ध के विचारो से प्रभावित होकर उस स्त्री ने उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया। शीघ्र ही यह बात पूरे गांव में फैल गई। गांववासी बुद्ध के पास आए और आग्रह किया कि वे इस स्त्री के घर भोजन करने न जाएं क्योंकि वह चरित्रहीन है।  बुद्ध ने गांव के मुखिया से पूछा- क्या आप भी मानते हैं कि वह स्त्री चरित्रहीन है ? मुखिया ने कहा कि मैं शपथ लेकर कहता हूं कि वह बुरे चरित्र वाली स्त्री है।आप उस...