ये लेख पढ़ दिल आपका मोम न हुआ तो आप पत्थर हैं.

बहुत मामूली बातों और मामूली ज़रूरतों को याद करके कई बार एहसास ही नहीं होता कि वो नेमत  है। कहीं मैंने ये quote पढ़ा था
 I have water to drink,
I have a running tap,
clothes to wear,
food to eat ,
bed to sleep
I am Lucky and I am thankful.

लॉकडाउन के इस मौसम में
ये जो बातें उपर लिखी है कितनी छोटी और सरल लगती है
मगर
आप लोग सोंच रहे होंगे मैंने ये सब क्यों लिखा आज जब मैं खाना खा रही थी
कई दिनों से मेरे फ़ोन पर  अनजान नम्बरों से
कॉल आते है दीदी कई दिनों से राशन की समस्या है हम लोग बाहर फँसे है या वो औरतें जो घर का डोर बेल बजा रही और बोल रही दीदी कैसे भी कर के मुझे राशन दीजिये  या फिर वो लोग जो पैदल निकल दिए घर तक कैसे पहुँचूँ इसका जुगाड़ लगा दीजिये
कितना इंतज़ार किया होगा ? उन लोगो ने जो अभी अपने घर वालों से दूर फंस गए लोकडौन में  और बड़ी मुश्किल से मेरा नंबर किसी तरह ढूंढ के मुझ तक अपनी बात रख रहे है कोई इंसान किस हाल से गुज़रता होगा जब वो अपने बच्चों को कहता है कि अब मैं तुम्हें खाना नहीं खिला सकता और अब माँगना है! और
हम यूट्यूब से नई चीज़ें बनाना सीख रहे हैं। और वो अनाज खोज खोज के इकट्ठा मुश्किल से कर रहे है कम से कम पेट भरी रहे
ये जो मदद हम इस वक़्त कर रहे हैं, ये मदद नहीं, दरअसल माफ़ी के लिए जुड़े हुए हाथ हैं - उनका हक़ है जिसे हमने जाने अनजाने अपने घरों में भर लिया है। हमने नहीं तो हम जैसे किसी और ने ही भर लिया होगा क्या हमारा दायित्व नही की भूख मिटाने में उनकी मदद करें सवाल ये सवाल उन लोगो से भी है जिन्हे लगता है ये जवाबदेही सिर्फ सरकार या ngo की है आराम से घरों में पकवान बना रहे लोगो से भी है अपने आस पास के लोगो मे अगर दिक्कत है तो मदद की जा सकती है।

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