अब दुनिया मे कब जीवन पटरी पर फिर से दौड़ेगी कोई नही जानता!
हमारे देश के लगभग लोगों के पास न अपना घर है न ज़मीन है न ही कोई सरकारी नौकरी। ये ऐसे लोग हैं जो दिन भर काम करतें हैं और उस काम के बदले जो मेहनताना उसे मिलता है उससे वो अपना जीवन चलातें है। ऐसे लोग अपना भोजन सामग्री भी प्रत्येक दिन खरीदतें हैं। इनके पास इतना पैसा नहीं होता कि ये महीने भर का राशन एकबार खरीदे! डेली कामना और डेली खाना इनके जीवन का फंडा कहिये या इनकी मजबूरी! इनके पास बैंक खाता होगा भी तो सायद खाली होंगे आज पूरी दुनियां ही कॅरोना वायरस जैसी महामारी के चपेट में आ चुकी है। हर देश की सरकारें अपनी जनता को स्वास्थ्य सेवा, धन सेवा आदि-इत्यादि सुविधाऐं मुहैया करवा रह है।
भारत सरकार ने भी इस महामारी से निज़ात पाने के लिए 'लॉकडॉन' करने का आह्वान किया है। जब लॉक डाउन खत्म होगा भारत की इकॉनमी क्या होगी सोच के डर लग रहा है क्योंकि जिनके पास घर नहीं है, खाने को कुछ नहीं है, जो डेली कमाने और खाने वालें हैं उनका क्या होगा? कहाँ जाएंगे ऐसे लोग?
क्या होगा उनका?
उम्मीद करती हूं सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने वाले सरकारी बाबू लोग
सरकार की योजना से लाभ उठाने में मदद कर पाएं बिना लालच के क्योंकि इसमें काफ़ी समय लग जाएंगे इस बीच ये ग़रीब, तिहारी मजदूर कहाँ जाएंगे?
बाज़ार की स्थिति भी सामान्य नहीं होगी कालाबाज़ारी धड़ल्ले से शुरू हो गईं है सप्पन्न लोग जमाखोरी कर चुकें है। किसी भी वस्तु का दाम सामान्य नहीं है, कम से कम दो गुना ज्यादा तो ज़रूर बढ़ा है। कुछ ज़रूरी सामान बाजार से गायब है
ऐसे हालात में ऐ मजदूर वर्ग कहाँ जाएंगे! सरकारी बाबू लोग महीने भर बैठा कर भोजन-पानी पहुंचा दे
इस विषय पर गंभीर रूप से सोचने की आवश्यकता है। नहीं तो भूखे मरने वालों की संख्या कॅरोना से मरने वालों से अधिक और अनगिनित होगी।
भारत सरकार ने भी इस महामारी से निज़ात पाने के लिए 'लॉकडॉन' करने का आह्वान किया है। जब लॉक डाउन खत्म होगा भारत की इकॉनमी क्या होगी सोच के डर लग रहा है क्योंकि जिनके पास घर नहीं है, खाने को कुछ नहीं है, जो डेली कमाने और खाने वालें हैं उनका क्या होगा? कहाँ जाएंगे ऐसे लोग?
क्या होगा उनका?
उम्मीद करती हूं सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने वाले सरकारी बाबू लोग
सरकार की योजना से लाभ उठाने में मदद कर पाएं बिना लालच के क्योंकि इसमें काफ़ी समय लग जाएंगे इस बीच ये ग़रीब, तिहारी मजदूर कहाँ जाएंगे?
बाज़ार की स्थिति भी सामान्य नहीं होगी कालाबाज़ारी धड़ल्ले से शुरू हो गईं है सप्पन्न लोग जमाखोरी कर चुकें है। किसी भी वस्तु का दाम सामान्य नहीं है, कम से कम दो गुना ज्यादा तो ज़रूर बढ़ा है। कुछ ज़रूरी सामान बाजार से गायब है
ऐसे हालात में ऐ मजदूर वर्ग कहाँ जाएंगे! सरकारी बाबू लोग महीने भर बैठा कर भोजन-पानी पहुंचा दे
इस विषय पर गंभीर रूप से सोचने की आवश्यकता है। नहीं तो भूखे मरने वालों की संख्या कॅरोना से मरने वालों से अधिक और अनगिनित होगी।


Ham log Corona ko jarur harayenge lage rahiye. Jai hind jai bharat
ReplyDeleteGood job👍👍👍
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