गंगा नदी पे अत्यचार पे रोक की पहल हम सभी को करना चाहिए

किसी राजनितिक पार्टी या किसी पे इल्जाम लगाने के लिए मैं ये रिपोर्ट नही लिख रही हो। बस गंगा माँ की वास्तविकता की एक झलक आमजनों को दिखला रही हूं। उक्त बातें डेली बिहार की संपादक सरिता राय ने कही। उन्होंने कहा कि बस हम सभी लोगों के धर्म या यूं कहें कि कर्तव्य पे सभी लोगों की दृष्टिकोण इस दृश्य पे दिखाने की कोशिश की उम्मीद करती हूं लोग अपनी दृष्टिकोण बदलेंगे। गंगा नदी हमारे जीवन का आधार है। आधुनिक मानव सभ्यता के विकास के साथ जल प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। शहरीकरण की प्रवृत्ति भी अजीब तरीके से बढ़ते जा रहा है। अब लोग पूजा कर के जो अवशेष बचते है उन्हें गंगा में फेंक देना सबसे ज्यादा ठीक समझते है और ये दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। और जो पहले गांव हुआ करते थे वे अब विभिन्न उद्योगों की स्थापना के बाद शहरों में तब्दील हो रहे हैं। ये गंगा घाट की स्थिती है दो दृश्य दिखे मुझे जो काफी तकलीफ देने वाले थे:- 1- पढ़ने की उम्र में बच्चे महज 10 रुपये के लिए गंगा किनारे नौका विहार करवाते है जो की इस उम्र में इनके लिए जोखिम भरा काम है। 2-गंगा माँ इस तरह अपने ऊपर कचरे को कैसे बर्दाश्त कर रही होंगी गंगा माँ पे हम इतने अत्याचार कर रहे कि आप देख सकते है। पोलोथीन से ज्यादा मुझे पूजा के लिए इस्तमाल की गई सामग्री दिख रही है। अब इसमें अक्सर हम योजना या सरकार को दोषी ठहरा कर अपना पल्ला झाड़ लेते है। और अपने कर्तव्य भूल जाते है इसमे हम आम जनता भी शामिल होकर प्रदूषण को रोक सकते है। अगर हम सभी संकल्प ले कि इधर-उधर हम कचरा नही फेकेंगे तो कुछ हद तक प्रदूषण रोक पाए शायद।

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