शिक्षा पायदान में हम कहाँ हैं ?
इस विषय पर कुछ लिखना अभी उचित होगा या नही, पर मुझे लगता हैं कि, मन में जब भी कोई ऐसी बात या विचार आये, जिसका सरोकार देश हित या आने वाली पीढ़ी से जुड़ा हो, तो अपनी बातों को लिख डालना चाहिए। भले ही उसके परिणाम जो हो
आजादी के पहले से ही हमारे देश में शिक्षा और शिक्षक की व्यवस्था रही है। ब्रिटिश शासकों ने भी अपनी ओर से पूरी तरह की चाक चौबन्द व्यवस्था कर रखी थी कि, इस देश के बच्चे उनकी शैक्षिक व्यवस्था से पढ़कर, एक और उम्दा किस्म का मानसिक गुलाम तैयार हो सके
दशकों तक, मानसिक गुलाम तैयार करने वाली फैक्ट्री का कारोबार मुनाफे में चलता रहा।
विडम्बना यह हुई कि, आज़ादी के बाद हमारे आजाद भारत को बनाने की जिम्मेदारी भी उन्ही लोगो पर आ गई जिन्होंने कभी न कभी मानसिक गुलामी वाली शैक्षिक पद्धति को स्वीकार किया था।
यह प्राकृतिक है कि, जिस मानसिकता में आप वर्षो रहते है, उसी तरह की मानसिकता आ जाती है और उस सोच को आप दूसरों पर भी परोसना चाहते है।
आजादी के बाद,
आज का भारत के निर्माताओं ने अपनी पूरी दूरदर्शिता से एक ऐसे भारत की कल्पना साकार करने की कोशिश की, जिसके हर पहलू में स्वार्थ भर गया
भारत में रहने वाले लग भग लोगो के लिए शिक्षा, आवास, भोजन, सुरक्षा, कपड़े आदि आवश्यकताओं की व्यवस्था के नियमावली बनायी गयी।
कुछ समय तक चला भी मगर फिर भी हालत बाद से बदतर हो गए
मुझे लगता हैं , आज राष्ट्र ने बहुत प्रगति की, अंतरिक्ष हो या रक्षा या उत्पादन हो मजबूत धमक हो.., पर कहीं न कहीं एक बात हम सबको जरूर कचोटती है और कचोटनी भी चाहिए कि, इतनी प्रगति के बावजूद आज, हमारे राष्ट्र के नयी पीढ़ी को शिक्षित बनाने के लिए कई तरह के प्रलोभन और लुभावन माध्यमो को अपनाया जाना पड़ता है
आज हमारे देश में, जो बड़ी समस्या दीखती है, वह है नयी पीढ़ी की शिक्षा और स्वास्थ्य..!
मान लीजिए हमने सारी सुविधाये, अपने बच्चों को सौंप भी दिया तो बच्चे अपने लिए और अपने देश के लिए क्या नया कर पाएंगे..?
जरूरत तो यह है कि, हमे अपने देश के सारे संसाधनों को इस देश की नयी पीढ़ी के शिक्षा और स्वास्थ्य पर आहूत करना चाहिए, ताकि वे हमारे देश को हम सबो की दबी हुई मानसिकता से बहुत ऊपर के देश का निर्माण कर सके..!
क्या आपको नही लगता कि, हम अपने बच्चो को मानसिक अपाहिज बनाने की तरफ तेज़ी से चल रहे है.? हमारी-आपकी मानसिकता हो गयी है कि, सारी वस्तुओं की व्यवस्था सिर्फ अपने बच्चों के लिए कर दो, ताकि बच्चो को भविष्य में दिक्कत न हो..! मगर कई बच्चे ऐसे मिल जाएंगे जो शिक्षण सहायता के अभाव में बीच मे ही अपनी पढ़ाई छोड़ कमाने में लग जाते है या और दूसरी मजबूरियों की वजह से पढ़ाई छोड़ देते है
इस बात को इस उदाहरण से समझना होगा कि, जो पिता अपने बच्चो के लिए घर और गाडी की व्यवस्था कर देते है, उनके बच्चे कभी अपने लिए नया घर या नयी गाडी की बात सोचते ही नही अब ये हमे समझनी बच्चों को इन चीजों की अहमियत हम कितना कर पाते ये जरूरी है .नयी पीढ़ी के शिक्षा और स्वास्थ्य सम्बन्धी क्षेत्रो पर ही खर्चा जाये ताकि, हमारे बच्चे बड़े हो कर देश को आगे बढ़ने में अपना योगदान दे
की यकीन मानियेगा कि, हमारी मानसिकता हमे बदलने की जरूरत है
आवश्यकता इस बात की है कि, नयी पीढ़ी के बच्चो को हम केवल बढ़िया स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा की व्यवस्था कर दे तो, आने वाली सदी निश्चित रूप से हमारी होगी, जिसमे हमारे राष्ट्र के युवाओं द्वारा कई क्षेत्रों में सफल होंगे

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