बच्चों से काम न मजबूरी में लें और न मजबूर कर के लें

बाल संगरक्षण का होना  हमारा नैतिक दायित्व

हर बच्चा का जीवन महत्वपूर्ण होता है ये हम सभी को समझना होगा चाहे वो बच्चा छोटू के रूप में आपको कई होटलो में दिख जाएंगे या गाड़ी बनाने वाले गैरेज में हम सभी हर रोज ये सब देखते है दुनिया की हर संस्कृति में बच्चे सबके दुलारे होते है फिर भी हम उनके संगरक्षण में विफल होते है इतने सारे कानून होने के बावजूद  समस्या विकार रूप लेता जा रहा है इतने साल हो गए मुझे  बाल मजदूरी और बाल संगरक्षण पे काम करते करते हर रोज एक नई कहानी उन बच्चों की खास वो ब्च्चे जो किसी न किसी अपराध से ग्रसित है आपने कभी गौर किया बाल मजदूरी में लग भग बच्चे अल्पसंख्यक या बहिस्कृत समुदाय के होते है और अपराध में   लिप्त बच्चे गरीब होते है
ये बहुत महत्वपूर्ण है कि हम सभी भारत के नागरिक कम से कम होटल में बच्चों के माध्यम से परोसा जाने वाला खाना का  बहिष्कार करे सिर्फ किसी एक व्यक्ति के करने से समस्या खत्म नही होने वाली मगर हम सभी थोड़ा थोड़ा हिस्से का कर सकते है

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