हम कितने सभ्य हैं खुद के अंदर झांकने की जरूरत है!

कहते हैं कि हमसब काफी विकसित हो गए हैं। 21वीं सदी में जी रहे हैं ।  हमसब आज भी आदिम युग में जी रहे हैं । जंगल का कानून चला रहे हैं। सोचिए कितना बदलें हैं हम...आज उसकी तो कल आपकी बारी भी हो सकती है ...
आरा के बिहिया में जो घटना घटी है वो घटना जितनी शर्मशार करने वाला नहीं है उससे कही अधिक शर्मसार करने वाली है हमारी खामोसी है।।
गौर करिए कितने पोस्ट आपको पढने को मिला  सिद्दू ने गला क्या लगा लिया सारे वीर एक साथ कूद पड़े लेकिन एक महिला को निर्वस्त्र कर पूरे
शहर में घूमाया गया है कही किसी कोने से भी आवाज नहीं आयी है                                           दुख की बात ये है कि हमारे ही समाज के लोग तमाश बिन थे
लोग चुप चाप इस कृत्य को देखते रहे कही से भी कोई मदद के लिए आगे नहीं आया, लेकिन बड़ा सवाल यह है ,चंद लंफगों के सामने पूरा समाज नतमस्तक क्यों हो जा रहा है समाज इतना कमजोर क्यों हो गया इसके कारणों को समझने कि जरुरत है क्यों कि कहां कहां पुलिस खड़ी रहेगी और किसी भी समाज पुलिस के सहारे सभ्य नहीं बनाया जा सकता ।।

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