शिक्षित होना हर बच्चे का अधिकार है हमे शिक्षा को लेकर हमारा नजरिया बदलने की जरूरत है। हम सभी अपने बच्चों को सबसे आगे देखना चाहते है पूरी कोशिश करते वो सबसे ज्यादा नंबर लाए बच्चों से ज्यादा अभिभावक परेशान रहते है मगर कभी समय निका
ल के उन बच्चों के बारे में सोचिये जो अपनी घर की जिम्मेवारियों के वजह से बाल मजदूरी में फंसे रहते है हम सभी का ये फर्ज बनता है कि अगर एक बच्चे की भी शिक्षा में मदद कर पाए तो सही मायने में शिक्षित होने का दायित्व निभा पाएंगे महत्व हर इंसान अपनी-अपनी समझ के अनुसार आंकता है। कोई इसे नौकरी पाने के लिए जरूरी समझता है तो कोई इसे ज्ञानवर्धन का जरिया मानता है। मगर मुझे लगता है सही मायने में शिक्षित वही है जो हर हाल में उसे अपना कर्तव्य समझकर करे और वो भी ऐसे जिससे समाज का भला हो जो इस बात को समझ गया वो शिक्षा का सही अर्थ समझ जाएगा और जब ऐसा होगा तभी शिक्षा से जुड़े हुए लोग और तंत्र शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक सुधार ला पाएंगे। शिक्षा की समझ और कर्तव्य का बोध हम सभी को होना चाहिए।
“निजी स्वतन्त्रता आज सबों की जरूरत हैं"
“निजी स्वतन्त्रता” जोसेफ़ स्तालिन ने कहा था मेरे लिए यह कल्पना करना कठिन है कि एक बेरोज़गार भूखा व्यक्ति किस तरह की “निजी स्वतन्त्रता” का आनन्द उठाता है। वास्तविक स्वतन्त्रता केवल वहीं हो सकती है जहाँ एक व्यक्ति द्वारा दूसरे का शोषण और उत्पीड़न न हो; जहाँ बेरोज़गारी न हो, और जहाँ किसी व्यक्ति को अपना रोज़गार, अपना घर और रोटी छिन जाने के भय में जीना न पड़ता हो। केवल ऐसे ही समाज में निजी और किसी भी अन्य प्रकार की स्वतन्त्रता वास्तव में मौजूद हो सकती है, न कि सिर्फ़ काग़ज़ पर।

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